हिन्दी भाषा का मानक स्वरूप।

हिन्दी भाषा का मानक स्वरूप।

उत्तर– 

        हिन्दी भाषा के मानक स्वरूप से तात्पर्य हिन्दी भाषा के उस स्थिर रूप से है, जो उस पूरे क्षेत्र में शब्दावली तथा व्याकरण की दृष्टि से समझने योग्य तथा सभी लोगों द्वारा मान्य हो, बोधगम्य हो, एवं व्याकरण सम्मत हो। आधुनिक हिन्दी मानक शैली का विकास खड़ी बोली से हुआ है। 

        हिन्दी भाषा को मानक स्वरूप प्रदान करने का प्रयत्न द्विवेदी युग शुरु हुआ, जिसमे महावीर प्रसाद द्विवेदी जी का योगदान अविस्मरणीय है। 

        हिन्दी भाषा के मानक स्वरूप को चार स्तरों पर देखा जा सकता है यथा ध्वनि स्तर, शब्दस्तर, रूप स्तर तथा वाक्य स्तर पर

ध्वनि स्तर पर 

  • मानक हिन्दी की ध्वनियो को स्वर तथा व्यंजन में बाटा गया है।
  •  'अ' और 'ह' ध्वनिया साथ आने पर 'अ'  का उच्चारण 'ऐ' मानक माना जाता है जैसे- महल का उच्चारण मैहल, कहता→कैहता।
  • 'ऐ', 'औ' के बाद 'य' अथवा 'व' आने पर  उच्चारण 'अय' या 'अव' के रूप में मानक। जैसे कौवा→ कउवा। 
  • ज्ञ ' का उच्चारण संस्कृत के 'ज्य' की बजाय 'ग्य' रूप में मानक माना गया है।

शब्द के स्तर पर

  • दो लिंग यथा पुल्लिंग तथा स्त्रीलिंग एवम दो वचन , यथा एकवचन तथा बहुवचन। 
  • एक से अधिक रूप में प्रचलित शब्दो का एक रूप मानक जैसे मोजा → जुराब ( मानक ), गंजी – बनियान (मानक)।
  • कारको के लिए विभक्ति चिन्ह निश्चित जैसे कर्त्ता ( ने ) , कर्म ( को )।
  • हिन्दी में शब्दों का निर्माण उपसर्ग , प्रत्यय , संधि आदि से।

रूप के स्तर पर

  • रूप स्तर पर शब्दो को विकारी ( संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया और विशेषण ) तथा अविकारी (क्रिया विशेषण, संबंध सूचक, समुच्चयबोधक व संबोधन सूचक ) में विभाजित।
  • 'आ' के साथ अंत होने वाले एकवचन पुल्लिंग शब्दों के अंत में 'ऐ' लगाने पर बहुवचन बन जाते ( व्यक्तिवाचक संज्ञा तथा संबंध सूचक शब्दों को छोड़कर ) उदा . लड़का – लड़के, कपड़ा – कपड़े ।
  • स्त्रीलिंग शब्दों में 'अ' एकवचन के साथ अंत होने वालो में 'एँ' लगाने पर बहुवचन हो जाते। जैसे  बहन – बहनें, गाय – गाये। 
  • 'आ' से अंत होने वालों में स्त्रीलिंग शब्दों में 'एँ' को जोड़ा जाता है। जैसे माता – माताएं, महिला – महिलाएँ। 
  • विशेषय के लिंग, वचन और कारक के कारण, विशेषणों में परिवर्तन। जैसे छोटा लड़का/छोटी लड़की, मेरा घर/मेरी घड़ी 

वाक्य के स्तर पर 

  • पदक्रम की दृष्टि से वाक्य मे पहले कर्ता , फिर कर्म और अंत में क्रिया आती है। जैसे राम ने पत्र लिखा। इसमें राम (कर्ता), पत्र (क्रम) तथा लिखना (क्रिया)
  • विशेषण का प्रयोग प्राय: विशेषय के पूर्व - जैसे- राम अच्छा लड़का है । 
  • क्रिया विशेषण का प्रयोग क्रिया से पूर्व - जैसे- वह धीरे - धीरे चल रहा है । चलना  (क्रिया) धीरे –धीरे ( क्रिया विशेषण)।

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