देवनागरी लिपि के प्रमुख गुण।

 देवनागरी लिपि के प्रमुख गुण।

उत्तर

        देवनागरी लिपि का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है। यह एक अक्षरात्मक लिपि है जिसे बांयी ओर से दांयी ओर लिखा जाता है। इस लिपि का प्रयोग हिन्दी , संस्कृत , मराठी , नेपाली आदि भाषाओं में किया जाता है। 

देवनागरी लिपि के प्रमुख गुण 

  • समवेततः प्रारम्भ मे मूल स्वर ( अ, आ, इ, ई, उ, ऊ ) और उनके संयुक्त स्वर ( ए , ऐ , ओ , बो ) तथा व्यंजनों का विशेषकर स्पर्श एवं अनुनासिक का विभाजन 
  • एक ध्वनि के लिए एक ही वर्ण संकेत। 
  • एक वर्ण संकेत से अनिवार्यत : एक ही ध्वनि व्यक्त।
  • उच्चारण के सूक्ष्मतम भेद को भी प्रकट करने की क्षमता।
  • वर्णमाला ध्वनि वैज्ञानिक पद्धति के अनुरूप है । 
  • देवनागरी लिपि को सीखना एकदम आसान केवल सीधी (।) , आड़ी ( - ) रेखा तथा अर्धवृत सीख लेने से अक्षर लिखना आसान।
  • देवनागरी लिपि का हर अक्षर शिरोरेखा युक्त है। 
  • संयुक्ताक्षरों को मिलाकर लिखने की एक अद्‌भूत विशेषता है ।
  • नागरी लिपि मे वर्ण - बोधक चिन्ह इतने भिन्न है कि किन्हीं दो चिन्हों के सम्बन्ध में परस्पर कोई भ्रम न हो।
  • भाषा की ध्वनियाँ उच्चारण की दृष्टि से विशेषतः परिवर्तित होती रहती है।  
  • देवनागरी लिपि में स्वर यदि स्वतंत्र रूप आते हैं तो पूरे वर्ण- चिन्ह का प्रयोग होता है जैसे- आग, ईद। किन्तु व्यंजन के साथ ‘अ’ के अतिरिक्त अन्य स्वरो का मात्रा - रूप प्रयोग होता है जैसे नाग, चतुर आदि। 

        हालांकि देवनागरी लिपि में कुछ जटिलाएं भी दिखती है किन्तु थोड़े बहुत समाधान के साथ देवनागरी लिपि को आसानी से सीखा जा सकता है ।

No comments:

Post a Comment

UPSC Prelims 2025 Paper PDF – Download Now & Analyze Your Performance

UPSC Prelims 2025 Paper PDF: UPSC Prelims 2025 Paper PDF – Download Now & Analyze Your Performance PdF link Available in this Post.... c...