खुसरो की कविता के आधार पर उनकी लोक चेतना पर संक्षिप्त निबंध लिखिए।
उत्तर
अमीर खुसरो खड़ी बोली हिंदी और उर्दू के प्रथम कवि माने जाते हैं। वे एक प्रमुख कवि होने के साथ-साथ गायक व संगीतकार भी थे, जिनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण उनकी रचनाएं हैं, जो उनके जीवन दर्शन की झलक देती है। उनकी कविताओं में विषय वैविध्य भी पर्याप्त मात्रा में है।
ज्ञानमूलक साहित्य (पहेलियां, मुकरिया आदि) से लेकर सामाजिक समस्याओं पर चोट करने तक की सारी अंतर्वस्तु उनके काव्य में विद्यमान है।
खुसरो की कविताओं में लोक चेतना के कई तत्व दिखते हैं जो उनकी अनुभवशील भावनात्मक समाज का परिचायक है। देश–प्रेम, भक्ति, समाज आदि से जुड़े तत्वों के साथ-साथ प्रेम व विरह की सूफी वेदना भी दिखती हैं।
लोगों के मनोरंजन की विषय वस्तु उनकी पहेलियों में दिखती है जो आज भी प्रचलित है जैसे –
ना मारा ना खून किया।
बीसो का सर काट दिया।।
खुसरो समाज के प्रति भी गहरी संवेदना रखते हैं जो विविध रूपों में उनके साहित्य में दिखती हैं।जैसे वे अपने एक गीत में पाखंडी साधु के चरित्र का पर्दाफाश किस प्रकार करते हैं–
उज्जल बरन, अधीन तन, एक चित दो ध्यान।
देखत में तो साधू है, निपट पाप की खान।।
खुसरो का एक विशेष योगदान उन कविताओं के कारण भी हैं जिनमें उन्होंने प्रेम के मार्ग पर बल दिया। उनकी बहुत सी कविताएं प्रेम को जीवन का सार तत्व बताती है। जैसे–
खुसरो दरिया प्रेम का उल्टी वाकी धार।
जो उतरा सो डूब गया जो डूबा सो पार।।
इसके अलावा अमीर खुसरो ने अपने समय में स्त्री की स्थिति को चिंता का विषय मानते हुए एक साधारण घर की बेटी के दर्द को आवाज दी। उनकी कविताओं का हिंदी साहित्य में बाल साहित्य के रूप में विशेष महत्वपूर्ण योगदान है। बच्चों की कोमल जिज्ञासाओं को जो आनंदपूर्ण शांति खुसरो की कविताओं से मिलती है, वह अतुलनीय है।
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