कहानी के तत्वों के आधार पर ईदगाह या पूस की रात कहानियों में से किसी एक की समीक्षात्मक विवेचना कीजिए।

कहानी के तत्वों के आधार पर ईदगाह या पूस की रात कहानियों में से किसी एक की समीक्षात्मक विवेचना कीजिए।

        प्रेमचंद हिंदी कहानी के इतिहास के शिखर पुरुष हैं उन्होंने अपने 30 वर्षों के रचनाकार 1960 से 1936 में लगभग 300 कहानियां लिखी जिन्हें बाद में मानसरोवर के आठ खंडों में संकलित किया गया। प्रेमचंद प्रेमचंद द्वारा अपने आरंभिक काल में आदर्शोन्मुख यथार्थवादी कहानियां लिखी और अपने अंतिम रचनाकाल के समय में वे पूरी तरह से यथार्थवादी हो गए थे। 


कहानी के तत्वों के आधार पर ईदगाह कहानी का समीक्षात्मक वर्णन:–


        ईदगाह कहानी बाल मनोविज्ञान पर लिखी गई हिंदी की सर्वश्रेष्ठ कहानियां में से एक है। ईदगाह कहानी में मुंशी जी ने बाल मनोविज्ञान का सूक्ष्म अंकण के साथ राजनीतिक सामाजिक व्यवस्था पर भी तंज किया है।


        कहानी के तत्वों के आधार पर ईदगाह कहानी का प्रमुख प्रतिपाद्य बाल मनोविज्ञान का चित्रण करना है कि कैसे अभाव व गरीबी बच्चे हामिद को बूढ़े हामिद का रोल करने को मजबूर करती हैं। 


        कथानक की दृष्टि से ईदगाह का कथानक सीधा, सरल व सजग है। कहानी में घटनाओं व चरित्र के वर्णन में अच्छा कसाव हैं। कथानक की गति भी संवेदना  के अनुरुप है।


        कथावस्तु की दृष्टि से ईदगाह कहानी की मूल चिंता अभाव में बचपन छीन जाने के साथ-साथ आर्थिक धरातल पर सामाजिक असमानता की है। प्रेमचंद ने कहानी में नमाज का दृश्य एवम वास्तविक व्यवहार की दुनिया के बीच कानस्ट्रास दिखाकर सिद्धांत व व्यवहार की खाई को स्पष्ट किया है। कथावस्तु में प्रेमचंद ने चलते चलते तत्कालीन सामाजिक राजनीतिक व्यवस्था पर बच्चों के खिलौनों की माध्यम से प्रहार किया है–
 “यहां कानिसिटिबल पहरा देते हैं तभी तुम बहुत जानते हो। अजी हजरत, यही चोरी करते है।”  


        इसके साथ ही मुंशी जी ने ईदगाह में भारतीय समाज में भारतीय सामाजिक संबंधों की उपस्थिति को गांव में परिवारों के बीच घनिष्ठ संबंध के रूप में दिखाया गया है।


         पात्र योजना की दृष्टि से ईदगाह में पात्रों की संख्या सीमित है तथा पात्र एक दूसरे में गूंथे हुए हैं।


        वातावरण की दृष्टि से मुंशी जी ने ईदगाह में कथावस्तु के अनुसार गांव में परिवारों का आपसी संबंध को बहुत अच्छे से उकेरा है।


         भाषा की दृष्टि से ईदगाह आम हिंदुस्तान की भाषा का प्रतिनिधित्व करती है, जो गांधी जी की भारतीय एकता के लिए प्रमुख कड़ी के रूप में थी। इसके अतिरिक्त ईदगाह में मुहावरे, सूत्रभाषा व प्रतीक भाषा का पात्र अनुकूल प्रयोग हुआ है जैसे–  बच्चे हामिद ने बुड्ढे हामिद का पार्ट खेला था, बुढ़िया अमीना, बालिका अमीना बन गई थी। ईदगाह के संवाद छोटे गतिशील है।


         सारांशत: सामाजिक मनोविज्ञान पर लिखने वाले मुंशी जी ने ईदगाह में बाल मनोविज्ञान का चित्रण पाठक को बालकों की प्रति सहृदयता के लिए उद्धृत करता है।

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