हिंदी की पहली कहानी पर टिप्पणी कीजिए।
भारतीय समाज में पारंपरिक कथाओं का प्रचलन प्राचीन काल से चला आ रहा है। किंतु आधुनिक काल में देखें तो हिंदी कहानी, हिंदी गद्य की सर्वाधिक प्रचलित विधाओं में से प्रमुख है। हिंदी की पहली कहानी कौन सी है? इस प्रश्न को लेकर काफी मतभेद है। जिसका एक प्रमुख कारण शुरुआती दौर में रचित रचनाएं तथा उनमें उपस्थित कहानी के तत्वों का आनुपातिक वितरण हैं।
हिंदी की हिंदी की आरंभिक कहानियों में देखें तो इंशाल्लाह खान की ‘रानी केतकी की कहानी’, रेवरेंड न्यूटन की ‘एक जमीदार का दृष्टांत’ तथा इसके अलावा ‘राजा भोज का सपना’, ‘एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न आदि को हिंदी की आरंभिक कहानियों में गिना जाता है, किंतु यह कहानी के तत्व पर खरी नहीं उतरती है।
19वीं सदी के प्रारंभिक वर्षों में सरस्वती तथा अन्य पत्रिकाओं में कुछ रचनाओं का प्रकाशन हुआ जिस पर हिंदी की पहली कहानी का विचार किया जा सकता है। जो निम्नलिखित है–
इंदुमती – किशोरी लाल गोस्वामी
ग्यारह वर्ष का समय – रामचंद्र शुक्ल
एक टोकरी भर मिट्टी – माधव राव सप्रे
दुलाईवाली – बंग महिला
इन रचनाओं में शुक्ला जी ‘इंदुमती’ को हिंदी की पहली कहानी मानते हैं बशर्ते कि वह किसी बांग्ला छाया की प्रति ना हो। बाद के कहानीकारों ने इंदुमती को शेक्सपियर की रचना टेंपेस्ट की छाया मानकर इसे हिंदी की पहली कहानी की दौड़ से बाहर कर दिया।
1901 में ‘छत्तीसगढ़ मित्र’ नामक एक गुमनाम सी पत्रिका में माधव राव सप्रे की कहानी ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ प्रकाशित हुई जो कि एक विधवा नारी तथा एक जमींदार की स्वार्थ–लिप्सा की कहानी है। कहानी के तत्वों की दृष्टि से देखें तो यह पहली रचना है जिसे कहानी मानने में कोई समस्या नहीं दिखती है।
इस प्रकार वर्तमान में हिंदी की पहली कहानी के रूप में माधव राव सप्रे की ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ हिंदी की पहली कहानी के रूप में स्वीकृत है।
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