कहानी और उपन्यास की समानता तथा का समानता के आधार पर तुलना कीजिए।
कहानी तथा उपन्यास दोनों ही आधुनिक गद्य की प्रमुख विधाएं हैं। इन दोनों विधाओं में कुछ समानताएं हैं तो कुछ असमानताएं भी है। सबसे पहले समानताओं को देखते हैं।
कहानी तथा उपन्यास में समानताएं–
- कहानी तथा उपन्यास दोनों ही गद्य विधाएं हैं।
- उपन्यास तथा कहानी दोनों में ही कथात्मक ढांचा लिया जाता है।
- जो छः तत्व (कथानक, चरित्र, वातावरण, उद्देश्य, भाषा शैली तथा संवाद) उपन्यास के माने जाते हैं, वही तत्व कहानी के भी माने गए हैं।
इन समानता ओं के आधार पर कुछ विद्वान कहानी तथा उपन्यास को समान मान लेते हैं तथा वे अंतर केवल आकार का बताते हैं। किंतु वास्तव में यह दोनों विधाएं भिन्न है।
कहानी तथा उपन्यास में अंतर–
- उपन्यास संपूर्ण जीवन की व्याख्या करता है जबकि कहानी जीवन के किसी एक अंग, एक घटना या एक मनोभाव को प्रस्तुत करती है।
- उपन्यास भाव प्रधान नहीं होते जबकि कहानियां भाव प्रधान हो सकती है।
- उपन्यास की गति अत्यंत धीमी होती है जबकि कहानी की गति अत्यंत तीव्र होती है।
- उपन्यास में सामान्यत: एक कथा नहीं होती बल्कि कई कथाएं साथ साथ चलती है, इसके विपरीत कहानी में सामान्यत: एक ही कथा को स्थान देना संभव होता है।
- उपन्यास में पात्रों की संख्या बहुत अधिक होती है, जबकि कहानी में यह संख्या कम होती है।
- उपन्यास में चरित्रों का विस्तृत चित्रण होता है इसके विपरीत कहानीकार को चरित्र के उतने पक्ष उभारने का मौका नहीं मिलता है।
- उपन्यास में देश काल, वातावरण का विस्तृत अंकन होता है जबकि कहानीकार को यह अवसर बहुत कम मिलता है।
- उपन्यास सामान्यता आकार में काफी विस्तृत होता है जबकि कहानी आकार में सीमित होती है।
इस प्रकार रामविलास शर्मा के शब्दों में कहें तो यदि उपन्यास एक बगीचा है, तो कहानी एक गमला है यानी इन दोनों में समग्रता के स्तर पर भिन्नता है।
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