बहुभाषाविद खुसरो एवं उनकी कविता (टिप्पणी)

बहुभाषाविद खुसरो एवं उनकी कविता (टिप्पणी) 

        अमीर खुसरो का काव्य न केवल भाव की दृष्टि से बल्कि भाषा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमीर खुसरो कई भाषाओं में निपुण थे। वे हिंदी विशेषत: खड़ी बोली, फारसी, उर्दू आदि भाषाओं के जानकार थे। जनजीवन के साथ मिलकर काव्य रचनाएं करने वाले में खुसरो का नाम सबसे महत्वपूर्ण है।

        अमीर खुसरो ने परिनिष्टित काव्य की रचना फारसी में की। अमीर खुसरो ने हिंदू घरों की लड़कियों के दर्द को महसूस किया तथा इसी को विषय बना कर उन्होंने एक गीत के माध्यम से इस दर्द को दिखाया–

काहे को बियाहे परदेस, सुन बाबुल मोरे

भैया को दीहे बाबुल महला, दो महला 

हमको दिए परदेश, सुन बाबुल मोरे 

मैं तो बाबुल तेरे खूंटे की गैया 

हांकी हुंकी जाऊं परदेश, सुन बाबुल मोरे।।

        अमीर खुसरो की प्रसिद्धि पहेलियों और मुकरियों के लिए काफी प्रसिद्ध है। इनकी पहेलियां और मुकरियों के कारण हिंदुओं तथा मुसलमानों के बीच संवादहीनता टूटी। पहेलियां मन में स्थित किसी वस्तु को लेकर या अपने पास पड़ोस में अनुमान करने के लिए विवश करती है। जैसे 

एक थाल मोती से भरा, सबके सिर औंधा धरा।

चारों और वह थाल फिरे मोती उससे एक ना गिरे।।

        अमीर खुसरो की पहेलियां भाषा की दृष्टि से साहित्य के इतिहास का एक अभिन्न अंग है। आमिर खुसरो के काव्य में खड़ी बोली एक काव्य भाषा बनने का प्रयास कर रही थी।

No comments:

Post a Comment

UPSC PRELIMS EXAM 2026 PAPER -II (CSAT)

UPSC PRELIMS EXAM 2026 PAPER -I (General Studies)   1. परीक्षा का परिचय और महत्व UPSC Prelims क्या है?:  यह सिविल सेवा परीक्षा (CSE) का पहला...