कहानी का परिचय देते हुए कहानी तथा कथा में अंतर बताइए।
कहानी कथात्मक गद्य की एक प्रमुख प्राकृतिक विधा है। जिस रचना में कथा का ढांचा हो, कुछ घटनाएं तथा चरित्र हो साथ ही वह आकार में लघु हो उसे कहानी कहा जाता है।
कहानी विश्व साहित्य की सर्वाधिक लोकप्रिय विधा है जो विश्व के समस्त सामाजिक सभ्यताओं के प्राचीन काल से ही किसी न किसी रूप में विद्यमान है कहानी गति की एक विधा है जिसमें काटना व पात्रों की संतुलित संख्या तथा यह आकार में लागू होती है मानवीय परंपराओं और मान्यताओं को निर्मित संगठित व सुरक्षित करने का श्रेय कहानियों को दिया जाता है। भारतीय समाज में कहानियों की परंपरा का प्रचलन प्राचीन काल से ही दिखाई पड़ता है उदाहरण के लिए जातक कथाएं पंचतंत्र कथाएं तथा हितोपदेश जैसी रचना है।
कहानी तथा कथा में अंतर
- कथाओं में आदर्शवादी और नैतिकता वादी दृष्टिकोण केंद्र में होता है जबकि कहानी में यथार्थवादी दृष्टिकोण को प्रमुखता दी जाती है।
- कथाओं का मूल उद्देश्य नैतिक शिक्षा प्रदान करना होता है।
- कथाओं में देश काल की प्रमाणिकता का दबाव कम होता है और अविश्वसनीय तथा काल्पनिक घटनाओं को बीच में व्याप्त महत्त्व मिल जाता है।
- कहानी की तुलना में कथा का आकार छोटा होता है उसी प्रकार कथा की तुलना में कहानी आकार में थोड़ी बड़ी होती है।
- वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कहानी की चर्चा करें तो उसका संदर्भ अंग्रेजी के ‘Short Story Movement’ से प्रभावित है, जबकि कथाओं की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है।
अंततः यह कहना उचित होगा कि कहानी व कथा आकार, स्वरूप, भाषा व तत्वों में समान है, इसमें अंतर केवल दृष्टिकोण का है जो जीवन के क्रमशः आदर्शवादी व यथार्थवादी पक्षों का उद्घाटन करते है।
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